काफी दिनों से मन में विचार चल रहा था की कुछ लिखा जाय, पर क्या लिखू अब भी नही समझ पा रहा हू | ऐसा नही की पहले कुछ लिखा न हो, एक्जाम के पेपर, टूटे हुए दिल की दिल फेक शायरी, फेसबुक के स्टेटस, ट्विट्टर के ट्विट और भी काफी कुछ, पर अब कुछ अलग लिखने का सोच रहा हू | वो सब कुछ जो इत्तु सा मन, दिमाग और दिल सोचते रहते है, इन तीनों का जिक्र इसलिए क्युकी इसने बीच का फर्क मै एक्सप्लेन नही कर सकता |
अब बात यहाँ अटक गयी की कहाँ से श्री गणेश करे, लिखने वालें तो पता नही कहाँ से शब्दों की माला बना लेते है, पर मेरा तो ना ही यह पेशा है और ना ही इसकी कोई तालीम ली है, यु बस लिखने का प्लान नही था और मेरे हिसाब से मुझमे ऐसी क्षमता भी नही की कुछ कमाल का लिख पाउ, एक दिन फेसबुक पे मनीषा जी का स्टेट्स देखा काफी दिलचस्प लगा, फिर उनकों फौलो किया और डेली उनके स्टेट्स पढ़े, फिर लगा की कमाल की बातें कहती है ये, पर ये बातें बिलकुल आसान सी थी जो उन्होंने जिंदगी से सिखा, जो सोचा बस लिखा दिया | फिर मुझे लगा की ये आसान है जो सिखा, देखा, वो लिख दिया, पर अब लिखने बैठा हू तो यह नही समझ पा रहा हू की क्या लिखू, तो फिर इतना भी आसान नही शायद यह |
पहले तो ये सोचने में वक्त निकला की हिंदी में लिखे की अंग्रेजी में, मै एक्सपर्ट किसी में भी नही, मैंने पाया मेरी हिंदी जायदा बेहतर है बजाय अंग्रेजी, पर फिर भी मै इसमें इतना बेहतर नही की हिंदी के शब्दों का सहीं इस्तेमाल कर सकू, यहाँ भी मैंने कई अंग्रजी वर्ड्स को हिंदी में ही लिखा है, फिर भी हिंदी बेहतर है | अब दुनिया जब से तब से क्या नही लिखा गया, इतिहास ने श्री मद भगवद गीता, वेद, पुराण, कामसूत्र और जाने क्या क्या लिखा, वर्तमान ने भी जम के टक्कर दी, और अब तो दायरा भी बड़ा हो गया | इन्टरनेट ने शब्दों को नई दुनिया दी, लिखने के नए तरीके आये, बहुत कुछ बदला, बहुत कुछ नया आया और आएगा, बहुत से वैसे टॉपिक्स आये जिनपे पहले बहुत कम बातें लिखी गयी या लिखीं ही नही गयी |
कई सारें महारथियों ने ऐसी बातें कही और लिखी जो दुनिया भूलना नही चाहेगी, जैसे खुशवंत सिंह जी ने कहा था “ There is no condom for a pen “, काफी गहरी और सीधी बात, अभी हाल ही में उन्होंने से एक इंटरव्यू में कहा की लोग मुझे ठरकी बूढा कहते है, और भी बहुत है, लिस्ट लंबी है |
अब मै देखा रहा हू की क्या लिखू ढूंढते – ढूंढते 500 वर्ड गए, तो मतलब शुरुवात हो गयी है, बाकी ये शुरुवात अच्छी है या बुरी पता नही, वो किसी ने कहा है की शुरू करना आपकी जिम्मेदारी है, बाकी लोगों का नजरिया यह तय करता है की आपकी शुरुआत अच्छी है या बुरी |
अब बात यहाँ अटक गयी की कहाँ से श्री गणेश करे, लिखने वालें तो पता नही कहाँ से शब्दों की माला बना लेते है, पर मेरा तो ना ही यह पेशा है और ना ही इसकी कोई तालीम ली है, यु बस लिखने का प्लान नही था और मेरे हिसाब से मुझमे ऐसी क्षमता भी नही की कुछ कमाल का लिख पाउ, एक दिन फेसबुक पे मनीषा जी का स्टेट्स देखा काफी दिलचस्प लगा, फिर उनकों फौलो किया और डेली उनके स्टेट्स पढ़े, फिर लगा की कमाल की बातें कहती है ये, पर ये बातें बिलकुल आसान सी थी जो उन्होंने जिंदगी से सिखा, जो सोचा बस लिखा दिया | फिर मुझे लगा की ये आसान है जो सिखा, देखा, वो लिख दिया, पर अब लिखने बैठा हू तो यह नही समझ पा रहा हू की क्या लिखू, तो फिर इतना भी आसान नही शायद यह |
पहले तो ये सोचने में वक्त निकला की हिंदी में लिखे की अंग्रेजी में, मै एक्सपर्ट किसी में भी नही, मैंने पाया मेरी हिंदी जायदा बेहतर है बजाय अंग्रेजी, पर फिर भी मै इसमें इतना बेहतर नही की हिंदी के शब्दों का सहीं इस्तेमाल कर सकू, यहाँ भी मैंने कई अंग्रजी वर्ड्स को हिंदी में ही लिखा है, फिर भी हिंदी बेहतर है | अब दुनिया जब से तब से क्या नही लिखा गया, इतिहास ने श्री मद भगवद गीता, वेद, पुराण, कामसूत्र और जाने क्या क्या लिखा, वर्तमान ने भी जम के टक्कर दी, और अब तो दायरा भी बड़ा हो गया | इन्टरनेट ने शब्दों को नई दुनिया दी, लिखने के नए तरीके आये, बहुत कुछ बदला, बहुत कुछ नया आया और आएगा, बहुत से वैसे टॉपिक्स आये जिनपे पहले बहुत कम बातें लिखी गयी या लिखीं ही नही गयी |
कई सारें महारथियों ने ऐसी बातें कही और लिखी जो दुनिया भूलना नही चाहेगी, जैसे खुशवंत सिंह जी ने कहा था “ There is no condom for a pen “, काफी गहरी और सीधी बात, अभी हाल ही में उन्होंने से एक इंटरव्यू में कहा की लोग मुझे ठरकी बूढा कहते है, और भी बहुत है, लिस्ट लंबी है |
अब मै देखा रहा हू की क्या लिखू ढूंढते – ढूंढते 500 वर्ड गए, तो मतलब शुरुवात हो गयी है, बाकी ये शुरुवात अच्छी है या बुरी पता नही, वो किसी ने कहा है की शुरू करना आपकी जिम्मेदारी है, बाकी लोगों का नजरिया यह तय करता है की आपकी शुरुआत अच्छी है या बुरी |
करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात के सील पर पडत निशान ||